Brand: Suruchi Prakashan
Product Code: Suruchi-3775
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डॉ. मारकंडे आहूजा केवल शब्दों के साधक नहीं, बल्कि गीता-दृष्टि से जीवन को देखने वाले चिंतक हैं। "संघ प्रार्थना : गीता के परिप्रेक्ष्य में " में लेखक ने संघ प्रार्थना के भावों को गीता की चेतना से जोड़ते हुए राष्ट्र, धर्म और आत्मोन्नति के गहरे सूत्रों को सरल एवं प्रेरक शैली में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक प्रार्थना को केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन-दृष्टि के रूप में देखने का आमंत्रण है।
डॉ. मारकंडे आहूजा के अनुसार गीता का चिंतन केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रहता; वह जीवन, राष्ट्र और मानवता के स्पंदन से जुड़ जाता है। यह पुस्तक उसी चेतना का साकार रूप है, जहाँ प्रार्थना आत्मबल बनती है, कर्मयोग राष्ट्रधर्म बनता है और गीता जीवन की दिशा। यह पुस्तक संघ प्रार्थना के प्रत्येक शब्द को गीता के प्रकाश में इस प्रकार उद्घाटित करती है कि राष्ट्रभक्ति केवल विचार न रहकर साधना बन जाती है।
यह पुस्तक भारतीय चिंतन, आत्मनुशासन और कर्मयोग की उस चेतना को स्पर्श करती है जो व्यक्ति को स्वयं से ऊपर उठाकर समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित करती है।
इस पुस्तक में संघ का राष्ट्रचिंतन और गीता का आत्मप्रकाश अद्भुत सामंजस्य के साथ प्रवाहित होता है।

Product Details
ISBN 978-93-75858-83-6
Pages 92
Binding Style Paperback
Language Hindi
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